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Vighnharta Shree Ganesh

Vighnharta Shree Ganesh यह भगवान श्री गणेश का सातवाँ अवतार है. भगवान श्री गणेश का सातवाँ अवतार विघ्नहर्ता की नाम से जाना जाता है.  मानव जाती के कल्याण के लिए अनेक देवताओं  इस धरा पर अनेकों बार अवतरित हुए और मानव जाती का कल्याण किया. उसी तरह आसुरी न से मनुष्य को बचाने के लिए भगवान श्री गणेश ने भी आठ अवतार लिए और उनका यह सातवाँ अवतार Vighn Harta Shree Ganesha के नाम से प्रसिद्द हुआ.

Vighnharta Shree Ganesh

भगवान श्री गणेश के आठों अवतारों का वर्णन गणेश पुराण, गणेश अंक आदि ग्रंथों में किया गया है. इन ग्रंथों के अनुसार एक बार मां पार्वती सखियों से बातें करती हुए हंस पड़ी तो उनके हास्य से एक पुरुष प्रकट हुआ, जिसे माता पार्वती ने मम नाम दिया और उसे गजानन की उपासना करने के लिए कहा.

Vighnharta Shree Ganesh

मम की तपस्या से प्रसन्न होकर Vighnharta Shree Ganesh ने उसी दर्शन दिया और वरदान मांगने को कहा. तब मम ने निर्विघ्न विजय का वरदान मांग लिया और उसके बाद वह राक्षसों के साथ मिल गया और उसने अपना नाम मामासुर रख लिया. जब ययः बात राक्षस शम्बर को पता चली तो वह अत्यधिक प्रसन्न हुआ और अपनी पुत्री से उसका विवाह करके राज्य को मामासुर को सौंप दिया और उसे राजा घोषित कर दिया.

इसके बाद उसने चारो तरफ आतंक मचाना शुरू कर दिया. चारो तरफ उसके आतंक से हाहाकार मच गया. सभी प्रकार के धार्मिक कर्मकांड बंद होने लगे. उसके बाद मामासुर ने इन्द्रलोक पर आक्रमण कर दिया. वहाँ भीषण युद्ध हुआ. लेकिन भगवान गणेश के निर्विघ्न विजय के वरदान के कारण देवताओं को हार का सामना करना पड़ा.

Vighnharta Shree Ganesh

उसके बाद सभी लोग भगवान गजानन की शरण में पहुंचे. तब भगवान गणेश  Vighnharta Shree Ganesh के रूप में प्रकट हुए और देवर्षि नारद से मामासुर को सन्देश भिजवाए कि मामासुर या तो अधर्म पाप का मार्ग छोड़कर धर्म के मार्ग पर आ जाए या फिर मरने को तैयार हो जाए.

Vighnharta Shree Ganesh

उसने देवर्षि नारद की बातों को अट्टहास में उड़ा दिया और युद्ध की चेतावनी दी. तब Vighnharta Shree Ganesh ने कमल पुष्प को अस्त्र बनाकर असुर सेना पर छोड़ दिया. इसके प्रभाव से असुर सेना शक्तिहीन होकर भूमि पर गिर पड़ी. तब मामासुर भयभीत होकर भगवान  Vighnharta Shree Ganesh के शरण में आ गया. तब श्री गणेश ने कहा कि वह उन स्थानों से सदैव दूर रहे जहां मेरी पूजा होती है. इस तरह संसार को मामासुर के आतंक से मुक्ति मिली और श्री गणेश के सातवें अवतार Vighnharta Shree Ganesh का अवतरण हुआ. दोस्तों यह कथा आपको कैसी लगी अवश्य बताएं और अन्य कहानी के लिए इस लिंक Mumba Devi Jinake Nam Par Basi hai Mumbai City पर क्लिक करें.

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