Shringar Ras kya hota hai

Shringar Ras kya Hota hai

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Shringar ras श्रृंगार रस क्या होता है। श्रृंगार रस पति और पानी, प्रेम और प्रेमिका का आधार है आकर्षण है। श्रृंगार रस को रसो का राजा माना जाता है। और श्रृंगार रस हो रसराज भी कहा जाता है। श्रृंगार शब्द दो शब्दों से मिल कर बना है। श्रृंग + आर = श्रृंगार , श्रृंग का अर्थ होता है – काम कि भावना का बढ़ जाना या उदेक होजाना। और आर का अर्थ होता है – वृद्धि गति और प्राप्ति। इसका मतलब जब प्रेम कि भावना या काम कि भावना जब को वृद्धि प्राप्त हो जाती है तो श्रृंगार रस उत्पन होता है। श्रृंगार रस का स्थाई भाव रति है। और रति का अर्थ प्रेम होता है।

श्रृंगार रस का आधार स्त्री और पुरुष या पति और पत्नी या फिर प्रेम और प्रमिका के बीच का प्रेम या लगाव। और इस तरह के प्रेम के बीज सुखद और दुखद दोनों तरह कि अनुभूतिया होती है।

Shringar Ras kya hota hai
Shringar Ras

Shringar ras ke kitne bhed hote hain

श्रृंगार रस के दो भेद होते है।
१- संयोग श्रृंगार रस
२- वियोग या विप्रलम्भ श्रृंगार

संयोग श्रृंगार रस क्या होता है | संयोग श्रृंगार रस परिभाषा क्या होती है।

जहा स्त्री और पुरुष या पति और पत्नी के मिलन का संयोग या मिलान का वर्णन होता है। वह सयोग श्रृंगार रस होता है। इसमें प्रेमी जान के विविध प्रेमपूर्ण क्रियाकलाप, मिलान और दर्शन, स्पर्श तथा वार्तालाप आदि का वर्णन होता है।
आलम्बन विभाव – नायक – नायिका, पति – पत्नी एक दोनों एक दूसरे के आश्रय और आलम्बन होते है।
उद्वीपन विभाव – चंदनी रात,उपवन, नदी तट, एकांत स्थान, वर्षा वसंत ऋतुएँ या सुंगंधित पदार्थ आदि। नायिका कि चेष्टाएँ, हाव – भाव तिरछी नजर और मुस्कान।
शारारिक क्रिया किस प्रकार होता है।
अनुभाव – कटाछ, आलिंगन प्रेमालाप, आश्रय कि दृष्टि।
सात्विक – स्वेद, अश्रु , रोमांच , कम्प आदि।
संचारी भाव – लज्जा , हर्ष , चपलता।

श्रृंगार रस का उदाहरण | संयोग श्रृंगार रस का उदाहरण

1- इस जंगल सी है तेरी – आँखे,
मैं रह भूल जाता हूँ।
तू रेल सी गुजरती है
मैं किसी पुल सा थरथराता हूँ।
2- है कनक सा रंग उसका सुर्ख फूलों से आधार।
देख सूरत प्रिय कि, भूल जाऊ मैं डगर

वियोग श्रृंगार रस या विप्रलम्भ श्रृंगार रस |

जहा पति – पत्नी के वियोग अथवा बिछड़ने का वर्णन होता है, वह विप्रलम्भ श्रृंगार रस होता है।
आलंबन विभाव पति – पत्नी, प्रेम – प्रेमिका
उद्वीपन विभाव – प्राकृतिक का दृश्य
अनुभाव – कम्प , अश्रु
संचारी भाव – उग्रता , चिंता , मोह , विषाद
उदाहरण –
अवधि आधार आस आवन की, तन मन बिथा सही।
अब इन जोग संदेसनि सुनी – सुनी बिरहिनि बिरह दही।।

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