Mobile Kaise Kam Karta Hai

मोबाइल कैसे काम करता है | Mobile Kaise Kam Karta Hai

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मोबाइल कैसे काम करता है? | Mobile Kaise Kam Karta Hai आज के समय में मोबाइल लगभग हर किसी के जीवन का हिस्सा है , आज के समय में हमारे काफी चीजे आसान होगी उसकी एक वजह मोबाइल भी है। लेकिन क्या आप जानते है की मोबाइल कैसे काम करता कैसे मोबाइल से बाते होती है एक देश से दूसरे देश में बात करना होता है तो सेकंड भर में बात हो जाती है आप के भी मन में ये सवाल होगा की मोबाइल कैसे काम करता है। और मोबाइल के क्यों अलग अलग Generation होते है।

Mobile Kaise Kam Karta Hai
Mobile Kaise Kam Karta Hai

जब आप आने phone पर बात करते है , तो आप के मोबाइल का माइक्रोफोन आप की आवाज सुन लेता है। उसेक बाद माइक्रोफोन एक Mems sensor और IC की मदद से आवाज को digital signal में बदल देता है। डिजिटल सिग्नल आवाज को 0 और 1 रूप में सहेजते है। आप के फ़ोन के अंदर स्थित एक एंटीना digital signal 0 और 1 के संकेतो को प्राप्त करता है। और विदुत्यचुंबकीय तरंगो में बदल कर संचारित करता है। Mems sensor full formMicro-electromechanical Systems – एमईएमएस माइक्रो इलेक्ट्रिकल सिस्टम के लिए खड़ा है और पिछले तीन दशकों के दौरान एक्सीलरोमीटर, जायरोस्कोप, प्रेशर सेंसर, डिजिटल माइक्रो-मिरर डिवाइस और अधिक के साथ एक तकनीकी और व्यावसायिक सफलता मिली है।

विदुत्यचुंबकीय तरंगो digital signal 0 और 1 को संचारित करने के लिए , Amplitude, Frequency, phase , या इनके संयोजन के लिए तरंग के गुणों को बदलता है। फ्रीक्वेंसी की बात करे तो 0 और 1 को क्रमश लौ और हाई फ्रीक्वेंसी के रूप में संचारित किया जाता है। इसलिए आप इन विदुत्यचुंबकीय तरंगो को अपने दोस्त तक भेजने का पता कर ले तो आप एक कॉल कर पाएंगे। मगर विदुत्यचुंबकीय तरंगो अधिक दुरी तय करने में सफल नहीं है।

मोबाइल फोन कैसे काम करता है?

मगर विदुत्यचुंबकीय तरंगो अधिक दुरी तय करने में सफल नहीं है। इस समस्या का निवारण करने के लिए सेलुलर तकनीक का उपयोग करके सेल टावर बनाये गए। सेलुलर तकनीक में एक भौगोलिक छेत्र को 8 पहलुओं वाली या अष्टकोणीय सेल में बता जाता है। जिसमे हर सेल का अपना एक टावर और फ्रीक्वेंसी स्लॉट होता है। आम तोर पर ये सेल टावर तारो द्वारा जुड़े होते है। ये विशेष ऑप्टिकल फाइबर केबल से जुड़े होते है। इन ऑप्टिकल केबल फाइबर को जमीन के निचे और समुन्द्र के अंदर बिछाया जाता है। तक देश विदेश से कनेक्टिविटी बनाई जा सके।

किसी एक फ़ोन के द्वारा पैदा की गई विदुत्यचुंबकीय तरंगे सेल टावर में पहुँचती है और वह उन विदुत्यचुंबकीय तरंगो को उच्च फ्रीक्वेंसी वाली लाइट प्लस में बदल दिया जाता है। इन लाइट पल्सेस को टावर के आधार में स्तिथ बेस ट्रांसिबर बॉक्स में सिग्नल को प्रोसेसिंग के लिए भेजा जाता है। प्रोसेसिंग सके बाद वौइस् सिग्नल को गंतव्य टावर तक भेजा जाता है। गंतव्य टावर में पल्सेस प्राप्त होने पर , गंतव्य टावर उन्हें विदुत्यचुंबकीय तरंगो में बदल कर बहार प्रसारित कर देता है। और आप के दोस्त का फ़ोन उन सिग्नलों को स्वीकार कर लेता है। और ये सिग्नल फिर ठीक उलटी प्रक्रिया से जुगरता है। और आप का दोस्त आपकी आवाज सुन पता है। इसी लिए ये सच है की मोबाइल कमुनिकशन पूरी तरह विरलेस नहीं होता है। इनमे vair वाले माध्यम भी प्रयोग में लाये जाते है। इस तरह से मोबाइल कमुनिकशन को अंजाम दिया जाता है।

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