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Mahabharat ke Pramukh Kaurav Patra २

Mahabharat ke Pramukh Kaurav Patra २

Mahabharat ke Pramukh Kaurav Patra २ मित्रो  अभी तक आपने पांडव पक्ष के प्रमुख योद्धाओं के साथ ही कौरव पक्ष के कुछ योद्धाओं के बारे में पढ़ा, चलिए अब कौरव पक्ष के अन्य वीर योद्धाओं के बारे में जानते हैं.

 

  Mahabharat ke Pramukh Kaurav Patra २  शाल्व 

यह एक क्षत्रिय राजा था और कृष्ण विरोधी था. इसने एक बार युद्ध में प्रद्युम्न को भी हरा दिया था. इसका वध दृष्टद्युम्न और सत्यकी ने मिलकर किया.

 

Mahabharat ke Pramukh Kaurav Patra २

Mahabharat ke Pramukh Kaurav Patra २

शल्य 

मद्रनरेश शल्य नकुल और सहदेव के सगे मामा थे. इनको वरदान था कि अगर इनके सामने कोई क्रोधित होता तो वे उसका बल अपने अन्दर लेकर उससे बड़े शक्तिशाली हो जाते थे. दुर्योधन ने छल से इन्हें  अपनी तरफ मिला लिया. पहले ही दिन इन्होने उत्तर का वध किया और युद्ध के अंतिम में इन्होने कर्ण का सारथी बनाना स्वीकार किया और क्कार्ण के मृत्यु के बाद इन्होने कौरव सेना का नेत्रित्व किया. इनकी मृत्यु युधिष्ठिर के हाथों हुई.

 

भीष्म

भीष्म गंगा और शांतनु के पुत्र थे, इसीलिए इन्हें गंगापुत्र कहा जाता है. इन्होने आजीवन ब्रह्मचर्य जैसी प्रतिज्ञा ली थी, तभी से भीष्म प्रतिज्ञा का चलन हुआ. इन्होने मृत्यु को अपने अधीन कर लिया था.

 

कर्ण 

महाभारत की प्रमुख पत्रों में से एक महादानी कर्ण कुंती और भगवान सूर्य के पुत्र थे. ये महाभारत के महानायक और महान धनुर्धर थे. इनकी दानवीरता इन्हें और भी महान बनाती  है. इनका वध अर्जुन ने किया था.

 

क्रिपाचार्य 

क्रिपाचार्य कौरव और पांडवों के गुरु थे. इनके महाभारत के युद्ध में भाग लेने में मतभेद है. हालाँकि कई जगह बताया गया हैं कि इन्होने युद्ध में भाग लिया था.

 

उलूक

उलूक शकुनी और रानी अरशी का पुत्र था.

 

विकर्ण 

विकर्ण एक महान कौरव योद्धा था.

 

ब्रिहदबल

यह भी एक बलशाली कौरव योद्धा था.

 

ध्रुमसेन और सम्यमणि 

ध्रुमसेन सम्यमणि का पुत्र था. इन्होने कौरव्व सेना की तरफ से युद्ध में भाग लिया था.

 

वाह्लीक

यह वाह्लीक साम्राज्य का रजा था. यह क्षेत्र इस समय कश्मीर के निकट है. यह कौरव सेना के सबसे वृद्ध योद्धा थे.

 

भुरिश्वा 

भुरिश्वा सोमदत्त  का पुत्र और कौरव तथा पांडव का चाचा था. इसने अकेले ही सत्यकी के दस पुत्रों का वध किया.

 

आचार्य द्रोण

आचार्य द्रोण कौरव और पांडवों की गुरु थे. अर्जुन ने इन्ही से धनुर्विद्या सीखी थी. इन्होने अर्जुन को सर्वश्रेष्ठ धनुर्धर का ख़िताब दिया था. अश्वस्थामा आचार्य द्रोण का पुत्र था. आचार्य द्रोण को वरदान था कि जब तक इनके हाथ में शस्त्र है इन्हीं कोई पराजित नहीं कर सकता है.

 

अश्वस्थामा 

अश्वस्थामा आचार्य द्रोण का पुत्र था. वह हमेशा ही अर्जुन से जलन रखता था. उसे लगता था कि उसके पिटा धनुर्विद्या में पक्षपात कर रहे हैनं. वे अर्जुन को श्रेष्ठ विद्या दे रहे हैं, जबकि ऐसा कुछ नहीं था.

 

मित्रों यह जानकारी Mahabharat ke Pramukh Kaurav Patra २ आपको कैसी लगी, कमेन्ट में बताएं और भी कहानी के लिए इस लिंक Mahabharat Ke Pramukh Pandav Patra Bhag 1 Bhakti Story    पर क्लिक करें.

 

 

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