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Kisan Aur Ghada Hindi Kahani

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Kisan Aur Ghada Hindi Kahani सिरसा गाँव में बनवारीलाल नामक एक किसान रहता था. वह बहुत ही परिश्रमी आदमी था. वह अपने मेहनत के बल पर अपने पुरे परिवार का भरण पोषण करता था. एक बार उसके गांव भारी सुखा पडा और पूरी फसल ख़राब हो गयी. बनवारीलाल ने कुछ फूल लगा रखे थे, उसे उसने बहुत ही मेहनत और लगन से लगाया था. उसने तय किया कि चाहे कुछ भी हो जाए मैं इन फूलों को किसी भी कीमत  पर सुखाने नहीं दूंगा.

 

बनवारी लाल ने दो घडा लिया और ५ गांव के बाद एक जगह जहां थोड़ा पानी था, वहां से पानी लाने लगा. वह रोज कई चक्कर पानी लाता, उसमें से एक घड़े में थोड़ा था सुराख था जिसमें से काफी पानी गिर जाता था, फिर भी वह खुश था . एक दिन पानी लाते हुए रास्ते में बनवारीलाल को कुछ विचित्र आवाज़ सुनाई दी. उसने पलटकर पीछे देखा तो उसे कुछ नहीं दिखा, उसने अगल-बगल देखा तो वहां भी कुछ नहीं दिखाई दिया.जब उसने ध्यान दिया तो देखा कि दोनों घड़े ही आपस में बात कर रहे थे.

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एक घड़े नें दुसरे घड़े से कहा कि तुम्हारे अन्दर तो खोट है, तुम्हारा पानी तो रास्ते में बहुत ज्यादा गिर जाता है…जबकि मेरा पानी पूरा घर तक पहुँच जाता है और अपने मालिक की पूरी सेवा करता हूँ.

 

तो इसमें मैं क्या कर सकता हूं….मालिक को मुझे बदल देना चाहिए….घड़े ने तुनक कर कहा

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ठीक है …मैं मालिक से कहकर बदलवा दूंगा

 

इसी बीच बनवारीलाल अपने घर पहुँच गया…और जब वह तीसरा चक्कर पानी लाने के लिए जाने लगा तो फूटा हुआ घडा जाने को तैयार ही  नहीं हुआ…..चूँकि बनवारीलाल दोनों की बात सुन चुका था…इसीलिए उसने प्यार से दोनों घड़ों को उठाया और पानी लाने चल दिया…..जब पानी लेकर वह वापस आने लगा तो दोनों घड़ों की चुहलबाजी शुरू हो गयी .

 

मैंने तुमसे नहीं आने के लिए कहा था…फिर भी तुम चले आये….मालिक की मेहनत भी नहीं देखते…..सही वाले घड़े ने कहा

 

मैं तो आ ही नहीं रहा था..मुझे तो मालिक जबरदस्ती लेकर आये….अबकी जाने के बाद मैं किसी भी कीमत पर नहीं आउंगा…फूटे वाले घड़े ने कहा

 

नहीं…नहीं…तुम्हें तो आना ही पडेगा….बनवारीलाल ने फूटे हुए घड़े से कहा

 

क्यों…..इसका पानी तो आपके फायदे में नहीं आता है… अच्छे घड़े ने कहा

 

तब बनावारिलाल ने अच्छे वाले घड़े से मुखातिब होते हुए….तुम दूसरी वाली लाइन की तरफ देखो, जिस लाइन पर फूटे हुए घड़ी का पानी गिरता है…वहाँ कितनी हरियाली है….उन छोटे पौधों के नीचे कितने ही छोटे मोटे कीड़े मकोड़े ख़ुशी से जी रहे हैं….लेकिन इसका मतलब यह कत्तई नहीं मैं तुम्हें नजरअंदाज कर रहा हूं…मेरी नज़रों में तुम दोनों की अहमियत बराबर है…..लेकिन तुम दोनों अपने ही घमंड में चूर रहोगे तो सबसे बड़ा नुकसान होगा……आज हम सबको मिलकर इस सूखे से लड़ना है…इस समस्या से लड़ना है…ना कि आपस में लड़ना है…..दोनों घड़ों को बात समझ में आ गयी….और फिर सभी लोग मिलकर इस सूखे से लड़े…और विजय पायी. तो दोस्तों यह कहानी Kisan Aur Ghada Hindi Kahani  आपको कैसी लगी अवश्य बताएं…और अन्य कहानी के लिए इस लिंक Devtaon ke Ghatak Ashtra Shashtra in hindi इस लिंक पर क्लिक करें.

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