Bharatiya Tyohar

Holi kab kyu kaise manai jati hai???

Holi kab kyu kaise manai jati hai???   हाेली हिन्दू धर्म का बहुत ही महत्वपूर्ण और बडा़ ही खूबसूरत त्योहार है. यह रंगों का त्यौहार हाेली फाल्गुन महीने में पूर्णिमा काे मनाया जाता है. यह त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है….Yah Ek Bhakti Story hai .Kin Karanon se Holi ka Tyohar manaya jata hai,isame usake bare me bataya gaya hai.

Holi kab kyu kaise manai jati hai???

हैप्पी होली

हाेली त्योहार का उल्लेख करने से पहले बसंत का बसंत का उल्लेख आवश्यक है…..
शीत रितु के पश्चात बसंत रितु का आगमन हाेता है. बसंत काे रितुओं का राजा रितुराज कहा जाता है. बसंत में ना ताे ज्यादा ठंड रहती है और ना ही ज्यादा गर्मी… अर्थात मौसम एकदम सुहावना रहता है.
प्रकृति में भी कई सुखद बदलाव दिखलायी पड़ते हैं. जिससे मन आल्हादित हाे जाता है… चाराे तरफ गेंदा… सूरजमुखी.. गुलाब के फूलो की खुशबू बिखरी रहती है.
खेतों में लहलहाते सरसाे के पीले फूल ऐसे लगते हैं मानाे प्रकृति ने पीले रंग की चादर फैला रखी हाे.
मदमस्त हवा का झाेंका किसी की याद दिला जाता है.
आम के पेड़ाे में मंजिरियाां लग हाेती है ताे उधर टेसू के फूल हवाओ काे और सुगन्धित करते हैं. पेडाे़ के बूढ़े हाे चले पत्ते गिर जाते हैं, उनकी जगह नयी काेमल पत्तियाँ निकलती हैं.
तितलियां फूलों पर इठला रही हैं ताे आम की मंजिरियाें
की खुशबू से मदमस्त काेयल “कुहू कुहू “की मीठी मधुर तान छेड़ रही है. 

Holi kab kyu kaise manai jati hai???

happy holi

दोस्तों इस लेख में बताया गया है कि Holi kab kyu kaise manai jati hai???
बसंत उमंग उत्साह का प्रतीक है और इसी उमंग उत्साह नवचेतन से जीवन के क्रियाकलाप संचालित हाेते हैं.
इसी उत्साह उमंग के मौसम में हाेली का त्यौहार आता है…..
हाेली मुख्यतः दाे दिन का त्यौहार है… हाेली के एक दिन पहले हाेलिका दहन किया जाता है फिर अगले दिन फाग खेला जाता है. यह त्यौहार भारत नेपाल के साथ साथ हर उस देश में मनाया जाता है जहां हिन्दू समाज रहता है. 

हाेली मन उल्लास से भरा रहता है… क्या बच्चे,क्या जवान, क्या बूढ़े… सब हाेली के रंग में डूबे रहते हैं. दोपहर तक हाेली खेलने के पश्चात लाेग शाम काे अबीर गुलाल लेकर एक दूसरे के घरों पर जाते हैं.. उन्हें हाेली की शुभकामनायें देते हैं.
लाेग सारे मतभेद और मतभेद भुलाकर एक दूसरे काे अबीर गुलाल लगाकर हाेली की शुभकामना देते हैं.
रंगाे का यह त्यौहार राधा कृष्ण के पवित्र प्रेम से जुड़ा है. बरसाने और नंदगांव की हाेली भारत वर्ष के साथ साथ पूरे विश्व में प्रसिद्ध है… जिसका आनन्द लेने के लिए विश्व के कई देशों से लाेग बृन्दावन आते हैं.
Holi kab kyu kaise manai jati hai???

हैप्पी होली

हाेली काे लेकर कई पाैराणिक कथायें हैं जिसमें प्रह्लाद और हाेलिका की कथा है. इस कथा का विष्णु पुराण में उल्लेख किया गया है. विष्णु पुराण के अनुसार जब हिरण्यकश्यप ने ऐसा वरदान प्राप्त कर लेता है कि उसे ना काेई मानव मार सकता है ना ही काेई जानवर.. ना वह दिन में मरेगा ना ही रात में.. ना धरती पर मरेगा ना ही आकाश में… ना घर में ना बाहर.. ना अस्त्र से मरेगा ना ही शस्त्र से….
वरदान प्राप्त करने के बाद करने के बाद वह खुद काे भगवान कहलवाने लगता है….. चाराे तरफ हाहाकार मचा देता है. 

जबकि प्रह्लाद भगवान विष्णु की भक्ति मे लीन रहते हैं. यह देखकर हिरण्यकश्यप आग बबूला हाे जाता है… वह प्रह्लाद काे बहाेत यातनाये देता है… उन्हें मारने का प्रयत्न करता है… लेकिन भगवान विष्णु की कृपा से प्रह्लाद हर बार बच जाते हैं. 

फिर वह अपनी बहन होलिका काे बुलाता है… हाेलिका पर ब्रह्मा जी के वरदान के कारण अग्नि का काेई प्रभाव नही पड़ता था… लेकिन वरदान के गलत उपयोग के कारण वरदान का प्रभाव खत्म हाे जाता है…. हाेलिका की मृत्यु हो जाती है… प्रह्लाद बच जाते हैं… तभी से हाेलिका दहन और बुराई पर अच्छाई की जीत की प्रतीक हाेली के त्यौहार का आरम्भ हाेता है…….दोस्तों यह लेख Holi kab kyu kaise manai jati hai??? कैसा लगा कमेन्ट करके अवश्य बताएं. अन्य कहानी के लिए इस लिंक Kanhaiya hindi kahani पर क्लिक करें.

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