Suspense Story

Ek Ladaki ka PRATISHODH Hindi suspense kahani

Ek Ladaki ka PRATISHODH Hindi suspense kahani  सुबह के करीब 6 बजे होगें. लाेगाें की भीड़ लगी हुई है. भीड़ काे चीरते हुये पोलिस इंस्पेक्टर परब तिवारी ( उम्र करीब 30 साल, लम्बा -चाेैडा बदन, राैबदार चेहरा )
हटिये… साइड हटिये… कहते हुये अन्दर आने की कोशिश कर रहे हैं….

और बाकी लाेग तरह – तरह की बाते कर रहे हैं..
एक आदमी -आज के समय में महिलायें सुरक्षित रह ही नहीं गयी हैं.. आये दिन कुछ ना कुछ, कही ना कहीं घटनाये हाेती ही रहती है.
दूसरा आदमी हां में हां मिलाते हुये – सही बात है… सब पुलिस की गलती है, कुछ काम नहीं करते,सिर्फ सरकार से पैसे लेते हैं.
शांत रहिये.. प्लीज़ शांत रहिये… ये बताईये कि सबसे पहले यह लाश किसने देखी थी…. परब तिवारी लाेगाे काे सम्बाेधित करते हुये कहा
मैने…. लाेग उस आदमी की तरफ देखने लगे ( उम्र 60 साल… राैबदार मूछें… सेना से रिटायर)
आपका नाम… परब तिवारी ने पूछा
ठाकुर विरेन्द्र सिंह…. उस व्यक्ति ने कहा
मैं करीब 5 बजे राेज की तरह मार्निंग वाक पर निकला था.. कि सहसा मेरी नजर सड़क किनारे नाले पर पड़ी.
मैंने देखा कि एक 18 से 20 साल की युवती की अर्धनग्न लाश पडी थी—-ठाकुर विरेन्द्र सिंह ने थाेडा घबराते हुये एक ही बार में सब बाेल दिया.
सर क्या लगता है –सिपाही राम सिंह विरेन्द्र सिंह के बयान के बाद परब तिवारी से बाेला
यह ताे अब पोस्टमार्टम के बाद ही पता चलेगा.. लेकिन शव के हालत से लगता है कि इसके साथ ज़रूर काेई अनहाेनी हुई है…. जल्दी एम्बुलेंस बुलाओ—परब तिवारी ने राम सिंह से कहा 

                          ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,  भाग -2 ,सीन 1……………..शाम का वक्त है… उजाले का राज ख़त्म कर अंधकार अपना साम्राज्य स्थापित करने की ओर अग्रसर है.
आबादी से बाहर सुनसान स्थान पर दाे शख्स बाते कर रहे हैं.

पवन ठाकुर उम्र 25-26 साल की हाेगी… मनोहर पुर गांव के दबंग नीलकंठ ठाकुर का इकलाैता बेटा है. मयंक वर्मा भी उसी गांव के दबंग दीनानाथ का लड़का है और पवन ठाकुर का लंगाेटिया यार है.
दाेनाे कद-काठी से हट्टे -कट्टे है,…साथ पैसे के राैब और खानदानी दबंगई के कारण इनकी आदतें बिगड़ गयी है.

पवन शराब के नशे में  भाई शराब के साथ शबाब का मजा मिले ताे कितना अच्छा हाे
हां यार, उस दिन रीता के साथ बहुत मजा आया था़.साली काबू में नहीं आ रही थी… इसलिए मारना पडा —मयंक शराब के नशे में अपनी बहादुरी दिखाते हुए बाेला

मयंक थाेडा चिन्तित हाकर…. साला वाे फाैजी विरेन्द्र सिंह ने सबसे पहले लाश काे देखा है…साला काेई परेशानी ताे नही खड़ी करेगा न.
चुप साला हरामी…. जब मुँह खाेलेगा, पनाैती ही बाेलेगा —–पवन थाेडे गुस्से से बाेला
अगर वह कुछ बाेला न ताे उसकी बेटी का भी वही हाल… रुकते हुये एकदम खुश हाेते हुये पवन बाेला… बेटा किसका थाेबडा देखकर उठा था ,वाे देख….
मयंक चहकते हुये –क्या बात है… यह ताे फाैजी की बेटी प्रतिभा है…. क्या लग रही है यार… सुना है आज इसका जन्मदिन है… आज यह 18 साल की हाे गयी.
पवन (आंखाें मे वासना का गुबार भरकर)  …ताे ठीक है.. इसका जन्मदिन यहीं मना लेते हैं.
दाेनाे हंसने लगते हैं.
और जैसे ही प्रतिभा करीब आती है…. दाेनाे उसे छेड़ते हुये दबोच लेते हैं.
प्रतिभा पूरी ताकत से खुद काे छुडाते हुये…. छाेडाे़…. छाेडा़े मुझे जाने दाे…. मैं तुम दाेनाे काे पहचानती हूं…. मैं पुलिस में कम्प्लेन्ट करूंगी…. बचाओ… बचावाे….
मयंक गुस्से में प्रतिभा काे एक थप्पड़ मारते हुये —यहां काेई ना आने वाला… और पुलिस की धमकी ना दे… हमने रीता की इज्ज़त लूट कर उसे मार डाला… क्या कर पाई पुलिस.
ज्यादा नखरे दिखायेगी.. तेरा भी वही हाल करेंगे… कहते हुये पवन ने उसे ज़मीन पर गिरा दिया.आप पढ़ रहे हैं Ek Ladaki ka PRATISHODH Hindi suspense kahani और यह हाकी भाग ३
                                                              भाग -३घर में खूब हलचल है. सजावट का काम तेजी से चल रहा है. ठाकुर विरेन्द्र सिंह आज खुशी से फूले नही रहे… क्यूं ना खुश हाें… आज उनकी इकलाैती बेटी प्रतिभा का जन्मदिन जाे है.

बहुत ही खूबसूरत, हंसमुख, मासूम, गाेरी -चिट्टी, मानाे ऊपर वाले ने बहुत ही फुर्सत में तराशा हाे.
ठाकुर विरेन्द्र सिंह थाेड़ा परेशान हाेते हुये अपनी पत्नी से–अरे प्रतिभा कहां है… दिखाई नहीं दे रही है.
ममता सिंह (प्रतिभा की मां, उम्र-48 साल, सुशील, पढ़ी लिखी गृहणी) —आ जायेगी अभी….शीला (उम्र -20 साल, खूबसूरत नैन -नक्श, रंग-सांवला) के साथ गयी है.               .,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,   सीन -2………………………

प्रतिभा बचने का भरपूर प्रयास करती रही…. राेती रही… इज्ज़त की दुहाई देती रही… लेकिन वासना के नशे में चूर पवन और मयंक ने उसकी एक ना सुनी… और उसकी इज्ज़त काे तार-तार कर दिया.

… आह… मजा आ गया …चल जा अभी… और हां किसी से इसका ज़िक्र भी ना करियाे…. नहीं ताे तेरे उस फाैजी बाप काे मार देंगे…. तुझे पूरे इलाके में बदनाम कर देंगे….. मयंक ने धमकी देते हुये कहा 

                      ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,भाग-4……………………प्रतिभा किसी तरह खुद को संभालते हुये घर आयी.
घर पर गाने बज रहे हैं… लाेग गानाे की धुन पर थिरक रहे हैं.
ठाकुर विरेन्द्र सिंह परेशान हाेते हुये-बेटा कितनी देर कर दी और ये क्या हुआ मिट्टी कैसे लगी है.

ममता सिंह भी परेशान हाते हुये –क् क् क्या हुआ बेटा
अचानक से प्रतिभा चाैंकते हुये बाेली –कु… कु.. कुछ नहीं मम्मा.. वाे.. वाे मैं गिर गयी थी… एक बाइक ने थाेड़ी टक्कर मार दी.
ममता सिंह और भी ज्यादा परेशान हाेते हुये -कब, कहां, कैसे…. और वो शीला कहां रह गयी.
शीला… शीला… प्रतिभा साेचते हुये बाेली
ममता सिंह थाेड़ी परेशान हाेते हुये –अरे वाे तेरी सहेली शीला
प्रतिभा याद आने पर–हां.. शीला वाे.. वाे ना जल्दी चली गयी… अभी आयेगी.
अच्छा ठीक है… चल हाथ मुंह धाेकर फटाफट तैयार हो जा… सारे लाेग आ गये हैं… और चाेट ज्यादा तो नहीं लगी ना —ममता सिंह थाेडा रिलैैक्स फील करती हुयी बाेलीं .
प्रतिभा बिना कुछ बाेले तेजी से अन्दर चली गई.
ममता सिंह विरेन्द्र सिंह की तरफ ऐसे देखीं जैसे पूछ रहीं हाें कि राम जाने क्या हुआ… जब गयी ता भली चंगी थी.Moral story in hindi

 

                       ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,   भाग-5.…………………….प्रतिभा कमरे का दरवाजा बन्द करके फूट फूटकर राेने
लगी…. उसके दिल पर क्या बीत रही थी उसे शब्दों में नहीं लिखा जा सकता. कुछ देर बाद वह तैयार हाेकर बाहर आयी. लेकिन आज उसका चेहरा मुरझाया हुआ था. काेई खुशी नही खी बस समाज काे दिखाने के लिए खुश हाेने का नाटक कर रही थी.

नमस्कार ठाकुर साहब… और क्या हाल है –सादे पोशाक में इंस्पेक्टर परब तिवारी ने महफिल मे प्रवेश करते हुये बाेला
अरे इंस्पेक्टर साहब आइये.. नमस्कार –विरेन्द्र सिंह बाेले
अरे ममता चाय पानी लाओ जरा… इंस्पेक्टर साहब आये हैं.
जी.. अभी लायी –मुस्कराते हुये ममता ने कहा
अरे नहीं -नहीं… रहने दीजिए.. मैंने चाय पानी सब बाहर लगे स्टाल से कर लिया है…. इंतजामात बहाेत अच्छे किये हैं आपने… वाे दरअसल मैं काफी समय पहले से महफिल में हूं… वाे आप लाेग थाेड़े परेशान लग रहे थे…. ताे मैं महफिल में ही ऱुक गया था.
  वैसे काेई ज़्यादा परेशानी की बात ताे नही है ना.
नहीं काई दिक्कत नहीं है.. वाे प्रतिभा शीला के साथ कही बाहर गयी थी ताे हम थाेड़े परेशान हाे गये थे क्योंकि उसे आने में देर हाे रही थी…..और वाे अंधेरे कही गिर गयी थी…. किसी बाइक से टक्कर लग गई थी…… विरेन्द्र सिंह ने कहा
परब तिवारी मन ही मन साेचते हुये —अंधेरे में…. लेकिन ठाकुर साहब के घर तक आने वाले रास्ते में काेई घनी झाडिया या पेड़ नही हैं… सड़क भी अच्छी है.. आज पूनम की रात है… जबकी प्रतिभा के कपड़े पर मिट्टी लगी हुयी थी… यह बाइक की चाेट नही है… कहीं ताे दाल में काला है.
ममता.. प्रतिभा काे बुलाइये… इंस्पेक्टर साहब से मिल ले—-विरेन्द्र सिंह ने कहा
परब तिवारी –नही नही.. रहने दीजिए… मैं मिल लेता हूँ.
प्रतिभा —परब तिवारी ने प्रतिभा काे सम्बाेधित करते हुये कहा
चाेेैंकते और थाेड़ा घबराते हुये प्रतिभा ने कहा —जी सर
सर नहीं… बेटा  अंकल बाेलाे और आप इतना घबराये हुये क्याे लग रहे हो… सब ठीक है न—-परब तिवारी ने पूछा
हां हां अंकल सब ठीक है –थाेड़ी मुस्कराहट के साथ नजरे चुराते हुये प्रतिभा बाेली
ठीक है बेटा आप इंज्वाय कराे…. आपका गिफ्ट आपके डैडी काे दे दिया है हमने —परब तिवारी बाेले
ओके अंकल कहकर तेजी से प्रतिभा वहां से चली गयी.
परब तिवारी मन ही मन साेचते हुये -प्रतिभा जरूर कुछ छुपा रही है.. लेकिन क्या… पता लगाना पडे़गा. 

 

                       ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,  भाग -6.………………………….पार्टी पूरे शबाब पर है… सब लाेग इंज्वाय कर रहे हैं.
तभी प्रतिभा के मोबाइल पर एक अननाेन काल आता है.
प्रतिभा काल रिसीव करती है…. हैलाे काैन
दूसरे तरफ से आवाज़ आती है —Happy Birthday Pratibha

तुम 5 मिनट के अन्दर बाहर आ जाना… तुम्हारे लिए एक  surprise  गिफ्ट है.. लेकिन आना जरूर.. कहीं किसी दूसरे काे यह गिफ्ट मिला ताे आपके लिए परेशानी हाे जायेगी…..और फाेन कट जाता है.

प्रतिभा साेचने लगती है कि यह अननाेन काल किसकी थी… उसे अब पार्टी में मौजूद हर किसी के ऊपर शक हाेने लगता है…. उसे ऐसा लगता है कि हर काेई उसका मज़ाक उड़ा रहा है…. कि अचानक उसे गिफ्ट की याद आती है… और वाे तेजी से अगल बगल देखते हुये कि कही काेई देख ना ले बाहर जाती है… वहां पर एक गिफ्ट रखा रहता है…. वाे अगल बगल देखती है काेई दिखाई नहीं देता है… फिर वह गिफ्ट काे वहीं खाेलती है… गिफ्ट खाेलते ही वह शाक्ड हाे जाती है…. गिफ्ट में उसकी न्यूड फाेटाेज रहती है…. वह बहाेत तेजी से अपने कमरे में जाती है… दरवाजा बंद करके आये हुये नंबर पर काल करती है… लेकिन नम्बर बंद आता है… फिर वह गिफ्ट को पूरा खाेलती है तो एक चिठ्ठी मिलती है… जिसमें लिखा रहता है  Happy Birthday Pratibha…  फाेटाेज कैसी लगी… बड़ी मस्त दुख रही हो… लेकिन यह मस्त फाेटाेज और लाेग भी ना देखे तो आज रात उसी पुल के नीचे आ जाना… बाय 

                           ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,  भाग -7.………………….प्रतिभा फूट-फुट कर राेने लगती है.. तब तक अचानक उसकी नजर एक फाेटाे पर पड़ती, जिसमें उसके पीछे शीला की फाेटीे दिखती है… जाे मुस्करा रही है… फाेटाे देखते ही प्रतिभा का दिमाग खराब हो जाता है.. वह साेचने लगती है कि आखिर शीला वहां क्या कर रही थी.

इसका मतलब शीला उन कमीनाें से मिली हुयी है…. हां अब प्रतिभा काे अपनी बर्बादी की तस्वीर साफ-साफ दिखायी देने लगी.
शीला ने जानबूझकर उस दिन देर की और मुझे इस रास्ते पर छाेड़कर बहाना करके खुद अलग रास्ते से चली गयी… फिर शॉर्टकट वाले रास्ते से घटना वाले स्थान पर पहुंच गयी.

प्रतिभा का खून खाैलने लगा. चेहरा गुस्से से लाल हाे गया… गुस्से में उसने शीला काे काल किया.. पूरी रिंग बजने पर भी कोई रिस्पांस नही आया. अब प्रतिभा का गुस्सा आैर बढ़ रहा था.
शीली आज पार्टी में नही आयी …इसका ही पूरा प्लान था….प्रतिभा गुस्से में बड़बड़ा रही थी और फाेन किये जा रही थी… लेकिन काेई जबाब नहीं आ रहा था.
गुस्से से भरी प्रतिभा ने शीला के वाट्सअप करने के लिए नेट खाेला… वो कुछ लिखती कि उसके पहले शीला के नंबर से एक विडियो रिसीव हुआ और उसने जब विडियो डाउनलोड हाेने के बाद खाेलकर देखा तो
उसके पैरों तले ज़मीन खिसक गयी.
वह तुरन्त शीला के घर के लिये निकली….
ममता सिंह —बेटा कहां जा रही हो.. अभी ताे पार्टी भी खत्म नही हुयी है..
मां वाे.. वाे शीला की तबीयत बहुत ज्यादा खराब हो गयी है… मै वही जा रही हूं…… बेटा किसी को साथ ले लाे… रात हाे गयी है… हां मै भाेलू(पड़ाेस का लड़का) के साथ जा रही हूं.
ठीक है… लेकिन जल्दी आना….
जब तक वह उसके घर पहुंचती पुलिस आ चुकी थी… शीला की हत्या हाे गयी थी. पुलिस घर की तलाशी ले रही थी.
इंस्पेक्टर परब तिवारी शीला के पिता राहुल राणा से —राहुल जी शीला की किसी से दुश्मनी थी.
नहीं सर शीला बहुत ही मिलनसार और नेकदिल लड़की थी… उसकी किसी से दुश्मनी कैसे हो सकती है —-राहुल ने कहा
बात काे काटते हुये एक सिपाही बाेला –सर यह एक मोबाइल मिली है.. लेकिन इसे बुरी तरह तोड़ दिया गया है.
परब तिवारी –ठीक है… इसे लैब में भेजाे और बाडी काे पोस्टमार्टम के लिए भिजवावाे.
ठीक है सर कहकर वह सिपाही वहां से चला गया. 

                        ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,  भाग -8..………………क्या हुआ बेटा शीला काे —प्रतिभा के घर आने पर ममता ने उससे पूछा
मां… वाे.. वाे उसकी हत्या हाे गयी… कहकर प्रतिभा राेने लगती है
कैसे…. ममता सिंह ने प्रतिभा काे चुप कराते हुये पूछा
परब तिवारी अंकल वहां गये…. जांच पड़ताल हाे रही हैं… मुझसे नहीं देखा गया… साे मैं चली आयी…. प्रतिभा ने सिसकते हुये कहा

काेई बात नहीं बेटा… आप जाओ आराम कराे… मै आपके पापा से बात करती हूं… वाे इंस्पेक्टर साहब से बात कर लेंगे.
प्रतिभा घर आकर विडियो वापस देखती है. उसमे पवन और मयंक दिखते हैं…. उनके हाथ में चाकू है और वाे शीला पर वार करने वाले हैं .
प्रतिभा एक नंबर डायल करती है… वह मयंक का नंबर हाेता है… लेकिन काल रिसीव नहीं होता है..
प्रतिभा परेशान हाेकर इधर उधर चलने लगती है.
करीब एक घंटे बाद प्रतिभा काे काल आता है.
प्रतिभा काल रिसीव करती है…. सामने से आवाज आती है… बाेलाे जानेमन मयंक बाेल रहा हूँ.
प्रतिभा बिना लाग लपेट के सीधा बाेलती है –मैं तैयार हूं… लेकिन वहां नहीं आ सकती… वहां काेई देख सकता है. मैं सड़क से दूर बने डाक बंगले में मिलूंगी.
ठीक है कहकर मयंक फाेन कट कर देता है… और यह बात पवन काे बताता है…. फिर दाेनाे प्लान बनाते हैं कि कल प्रतिभा काे वहीं मार देंगे. 

                            ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,, भाग -9…..…………… 

अगले दिन तय समय पर ठीक 5 बजे मयंक और पवन डाक बंगले पर पहुंचते हैं…. प्रतिभा मुख्य दरवाजे पर खड़ी रहती है.. इन दाेनाे काे देखते हुए राेमान्टिक इशारे करते हुये बंगले में चली जाती है.
भाई लगता है इसकाे भी मजा आया था़…. मयंक पवन से हंसते हुये बाेला…. फिर दाेनाे हंसते हुये आगे बढ़ते हैं कि अचानक मयंक एक बड़े से गड्ढे में गिर जाता है जाे कि ऊपर से घास और झाड़ियाे से ढककर रखा गया था…..पवन उसे निकालने के लिए आगे बढ़ता ही है कि उस गड्ढे में से तेज आग की लपट उठती है…. और वह घबराकर पीछे की तरफ गिर जाता है… और देखता है कि प्रतिभा के हाथ में माचिस हाेती है.

Abhishek pandey
तूने क्या किया… मेरे भाई काे जला दिया कहते हुये पवन गुस्से से चिल्लाते हुये उठता है.
‘खटाक’ ….जितनी तेजी से पवन उठता है उसकी दाेगुनी तेजी से प्रतिभा उसके ऊपर लाेहे के राड से प्रहार करती है और वाे गिर जाता है.
मैने क्या बिगाड़ा था तेरा… क्यू किया मेरे साथ ऐसा… मेरी ज़िंदगी नर्क बना दी तूने… ..राेते हुये प्रतिभा ने एक और वार किया… प्रतिभा के ऊपर खून सवार था… उसे उसकी बर्बादी का हर सीन दिखाई दे रहा था…. उसने गुस्से में कई वार किया…. और पवन वहीं गिर गया.
प्रतिभा वही निढाल हाेकर खूब जाेर जाेर से राेने लगती है…. कुछ देर बाद प्रतिभा उठी और पवन के जेब से मोबाइल निकालकर उसे जलती हुयी आग में फेक दिया और वहां से जाने लगी.
अभी वह कुछ ही कदम आगे बढ़ी हाेगी कि गाली चलने की आवाज आयी ‘धांय’वह तेजी से घबराकर पीछे मुड़ी ताे देखा कि सामने इंस्पेक्टर परब तिवारी बंदूक ताने खड़े थे और पवन कुछ दूर पर गिरा हुआ था  ….उसके हाथ में चाकू था.

प्रतिभा यह सब देखकर राेने लगती है.
नहीं बेटा राेते नहीं…. मुझे सब पता चल चुका है… इनकाे ऐसी ही सजा मिलनी चाहिए… मैंने सारे सबूताें काे मिटा दिया है…. चलाे घर चलाे… सारे लाेग परेशान हाे रहे हैं….. परब तिवारी ने प्रतिभा काे चुप कराते हुये बाेला.
प्रतिभा के चेहरे पर जीत की खुशी झलक रही थी. दोस्तों यह Ek Ladaki ka PRATISHODH Hindi suspense kahani कैसी लगी. अवश्य बताएं और इस तरह   की कहानियों के लिए ब्लॉग को सब्स क्राइब जरुर करें. अन्य कहानी के लिये इस लिंक रैकेट hindi Moral Story क्लिक करें. ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,   समाप्त…………………………..
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