Wed. Sep 29th, 2021
    Dhyan kya hai
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    Dhyan kya hai अगर आज के समय में हम अपने लिए कुछ समय निकल लेते है। Dhyan kya hai तो वो काफी सुकून का पल होगा क्यों आज कल कि इस व्यस्तता में कोई सुकून कि जिंदगी नहीं है। व्यस्तता इतनी है कि लगता है। हमे कभी आराम करने को ही नहीं मिलेगा हम अपने लिए समय ही नहीं निकल पा रहे है।

    Dhyan kya hai
    Dhyan kya hai

    और ज्यादा व्यस्त होने के कारण हमारी शरीर में कई तरह कि बीमारिया होते जा रही है। जैसे गठिया रोग और भी बहुत सी चीजी है। हम समय से पहले अपनी ऊर्जा खो दे रहे है। हमे अपने शरीर और मस्तिष्क को आराम देना चाहिए ये बहुत जरुरी है।

    अगर आराम नहीं देंगे तो ये हमारा साथ देना छोड़ देंगी। हमारी दिनचर्या कैसी है। इसका बहुत ज्यादा असर पड़ता है। हमारे शरीर और मस्तिष्क पर पुरे दिन हम किस तरह कि ऊर्जा अपने शरीर को देरहे है। इसका प्रभाव हमारे जीवन पर पड़ता है। अगर हम अपने दिन चर्या में कुछ अच्छे बदलाव करे तो हमे काफी ज्यादा प्रभाव देखने को मिलेगा।

    Dhyan kya Hota hai or hume dhyan kyu karna chahiye

    Dhyan kya hai
    Dhyan kya hai

    ध्यान क्या होता है। और हमे ध्यान क्यों करना चाहिए
    आप सभी लोग ध्यान शब्द सुने होंगे और काफी लोगो को पता भी होगा कि ध्यान का अर्थ क्या होता है। लेकिन वास्तव में ध्यान क्या है। इसके बारे में काम लोगो को ही पता होगा। आज के समय में ध्यान कि परिभाषा बदल गई है। ध्यान क्या है। और ये हमारे जीवन में क्यों उपयोगी है।

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    Dhyan ka arth kya hai | ध्यान कैसे करें

    ध्यान सिर्फ एक शब्द नहीं है। ध्यान इस संसार से कही परे है। ध्यान हर कोई नहीं लगता और जो लोग लगते है। वो सही से ध्यान नहीं कर पते है। जो वास्तव में साधु संत और योगी है। उनका खाना है कि ध्यान लगाना बहुत कठिन है जिसकी हम कल्पना भी नहीं कर सकते है। लेकिन ध्यान लगाना नामुनकिन भी नहीं है। अगर हम कुछ भी ठान ले तो वो कर सकते है।

    अगर आप ध्यान के बारे में जानना है। तो आप को इसका अभ्यास करना होगा। आप को कोई भी सिर्फ ध्यान कि परिभाषा समझा सकता है। लेकिन अंततः आप को ही ध्यान लगाना है। और इसके लिए आप को भौतिक शरीर और मानसिक सीमाओं से परे जाना पड़ेगा। ध्यान लगाने के लिए भौतिक और संसारिक वस्तुओं का कोई उपयोग नहीं है। या कोई भूमिका नहीं।

    अगर आप आप गहनता से ध्यान लगाए या ध्यान करे तो आप इस ब्रह्माण्ड से भी परे एक लोक जिसे शास्त्रों में परमात्मा का निवास अस्थान होता है। उसे भी जान सकते है। आप को मनुष्य का जीवन क्यों मिला मृत्यु क्या है जन्म क्या है इन सब के उत्तर आप को मिल जायेंगे।

    Mahan purush dhyan kaise karte hai

    जितने भी महान लोग थे उनका यही कहना था। कि ध्यान को सिर्फ अनुभव से ही समझा जा सकता है। इन लोगो के अनुसार ध्यान उतना कठिन नहीं है जितना हमे प्रतीत होता है। हर वो चीज हमे कठिन लगती है। जो हमे अपने मन इच्छा और शरीर से परे ले जाती है। हमे अपने ध्यान को नियंतरण में करना होगा। तभी शयद हम अपना अस्तित्व समझ पाए।

    ध्यान करने से मन में जिस भी तरह के मोह माया है वो हट जायेगा और आप सिर्फ सत्य को देख रहे होंगे इसी अवस्था को निर्वान कहा जाता है। अलग अलग धर्मो में अलग अलग नाम दिए गए है। महान पुरषो का कहाँ है। कि जो ध्यान लगा सकता है उसके लिए कुछ भी आसान है।

    कोई भी कठिनाई हो या कैसी भी परिस्थिति हो वो आसानी से पार कर सकता है। क्युकी वो इंसान ये समझ जाता है। कि ये जो भी हो रहा है वो चढ़िक है। इसीलिए हिन्दू धर्म में ध्यान करना मूल धर्म बताया गया है। जब आप को न तो वर्तमान और न ही भविष्य कि चिंता हो या इनका विचार भी मन में न आये यही यही अवस्था ध्यान का है।

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    महर्षि पतंजलि के द्वारा बताये गए अष्टाम योग का सातवा अंग ध्यान है। योग का अर्थ है आत्मा और परमात्मा का योग, अथार्त जब मनुष्य अपने आत्मा को परमात्मा से जोड़ लेता है तो इस वास्तविक अवस्था को ही योग कहते है। और इसमें सबसे महत्वपूर्ण भूमिका ध्यान का होता है।


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