Hindi Kahani Moral Story

DAVA HINDI KAHANI

Written by Hindibeststory

DAVA HINDI KAHANI इस साल भी बरसात धोखा देगी क्या ? पिछले दो सालों से यही हाल रहा है बरसात का, इस साल तो और भी ज्यादा परेशानी हो रही है. जून महीने में बारिश की एक बूँद भी नही गिरी, जुलाई भी ख़त्म हो रही है लेकिन दो-चार बूँदों को छोड़कर बारिस का कुछ आता-पता नहीं है. अब तो बस अगस्त महीने की थोड़ी आशा है, अगर अगस्त भी ऐसे ही रहा तो…… फसल चौपट ( यह आवाज़ पीछे सी आई)

रघु ने पीछे मुड़कर देखा तो उसकी पत्नी गिरिजा देवी खड़ी थी.
गिरा देवी- मैं कब से देख रही हूँ , आप खुद से ही बातें किए जा रहे हो
रघु शिकायती स्वर में- क्या करूं, सब भगवान की लीला है, मरे को और मरते हैं. तुम्हें तो समय मिलता नहीं है तो मान हल्का करणने के लिये खुद से बातें कर लेता हूँ.
गिरिजा निरुत्तर कुछ देर खड़ी रही, फिर बात बदल कर कहा कि चलिए कुछ खा लिजिये, फिर इसके बारे में कुछ सोचा जाएगा.
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Kisaan

DAVA HINDI KAHANI
सुरेंद्र नगर का जय भारत इंटर कालेज, जहां पिछले चार दिनों से हाकी प्रतियोगिता चल रही थी. जय भारत इनटे कालेज अभी तक अजेय थी, उसका सबसे बड़ा कारण था उसका सबसे तेज खिलाड़ी प्रथमेश. जब प्रथमेश मैदान में हाकी लेकर आता तो दर्शकों का उल्लास अपने चरम सीमा पर होता था….लोग एक स्वर में नारा लगाते…प्रथम..प्रथम…प्रथमेश.
प्रथमेश भी दर्शकों को निराश नहीं करता, नाम के अनुरूप वह खेल और पढ़ाई दोनो ही क्षेत्रों में बहुत आगे था. प्रथमेश रघु का छोटा बेटा था. उससे पिता का दुख देखा नहीं जाता था, वह किसानों के हर दुख हर समस्यायों से वाकिफ था. एक दिन उसने अपने पिता रघु से पूछा ” क्या ऐसा नहीं हो सकता कि कम पानी मीन ही अच्छी फसलें उगाई जा सकें”.
बेटा हम पढ़े लिखे तो हैं नहीं, जो अपने पिताजी से विरासत में मिला उसी ही जानते हैं- रघु ने कहा.
प्रथमेश- मैं अपनी पूरी कोशिश करूँगा कि इस विरासत को बदल सकूं.
सुरेंद्र नगर के डी एम दीपक मिश्राने एक कार्ड को देखते हुए अपने चपरासी बहादुर को आवाज दिया..बहादुर…ओ बहादुर…लेकिन बहादुर का कहीं पता नहीं….दीपक मिश्रा झुंझला कर अपनी कुर्सी पर बैठे ही थे कि बहादुर वहां हाजिर हो गया.
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Farmaer

दीपक मिश्रा- कहां चले गये थे…कब से आवाज़ लगा रहा हूँ.
बहादुर- जी साब, एक बिल्ली गमले के पास बैठी थी उसे ही भगा रहा था.
दीपक मिश्रा- तुम्हारा नाम बहादुर किसने रखा, तुम एक बिल्ली को भगाने में इतना समय लगाते हो.
बहादुर – मेरे नाना से साब, मेरा नाम बहादुर रखा.
दीपक मिश्रा- चुप करो, जाओ फटाफट मेरी गाड़ी तैयार करावो, अभी तुरंत निकलना है.
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DAVA HINDI KAHANI

खेल अपने अपने सबाब पर था, दोनो टीमें मजबूती से खेल रही थी, यह फाइनल मैच था. जय भारत के खिलाफ की टीम भी बहुत मजबूत थी, अभी मुकाबला ३-३ के बराबरी पर था, की अचानक खेल का रुख़ ही बदल गया, कुछ ही मिनटों में प्रथमेश ने एक के बाद एक ५ गोल दागे, अब मुकाबला ८-३ का हो गया और यह आख़िरी तक चला, अंत में जय भारत की टीम विजयी हुई.

प्रथमेश को इस अविस्मरणीय खेल की लिए दीपक मिश्रा के हाथों सम्मानित किया गया. दीपक मिश्रा ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि भारत एक कृषि प्रधान देश है. भारत की अर्थव्यवस्था अच्छी पैदावार पर टिकी रहती है. आज हालत यह है कि कोई खेती करना नहीं चाहता, हालत इतने बिगड़ चुके हैं कि पता चल जाए कि लड़का खेती करता है तो उसके लिए अच्छे रिश्ते आने बंद हो जाते हैं, ऐसे में प्रथमेश ने जो यह चमत्कारी प्रोजेक्ट तैयार किया है जिससे कम पानी में भी अच्छी पैदावार होगी, यह क़ाबिले- तारीफ है. इस प्रोजेक्ट लिए इसे राष्ट्रपति कार्यालय से विशेष न्योता आया है. सरकार खुद इस प्रोजेक्ट के लिए फंड उपलब्ध करा रही है. इस प्रोजेक्ट से सभी किसान लाभान्वित होंगे. प्रथमेश के सम्मान में लोगों ने अपनी -अपनी जगहों से उठ कर टली बजाई. उसकी पिता की आँखें खुशी से भर आई. आज प्रथमेश नी अपना वादा पूरा कर दिया था.  Dosto yah DAVA HINDI KAHANI कैसी लगी ..अवश्य बताएं.

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