• January 2, 2022

Dahej Kya Hota Hai | Dahej Ka Arth Kya Hota Hai

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Dahej Kya Hota Hai (दहेज क्या होता है।) Dahej Ka Arth Kya Hota Hai (दहेज का अर्थ क्या होता है।) आज के समय में दहेज को बहुत निम्न कोटि का शब्द माना जाता है। दहेज के कारण देश में लाखो case हर महीने आते है। लेकिन ये अलग बात है कि उनमे से कई केस सच्चे होते है तो वही बहुत से केस झूठे भी होते है। मगर वास्तव में दहेज क्या है। किन परिस्थितियों में शादी के समय या शादी के बाद सामान और रुपयों के लेने पर उसे दहेज नहीं माना जाता है।

Dahej  Kya  Hota  Hai | Dahej  Ka  Arth  Kya  Hota  Hai
Dahej Kya Hota Hai | Dahej Ka Arth Kya Hota Hai

Dowry system article in Hindi 2021

सबसे पहले हमे दहेज के सामाजिक पहलू को समझना होगा। कुछ समय पहले या कुछ centuries पहले दहेज उतना पवित्र होता था। जितना कि दान शब्द होता है। शादी के समय बेटी के पिता अपनी बेटी को प्यार से कुछ सामान और कुछ नकद देते थे। पिता अपने भावना के अनुसार और अपने हैसियत के अनुसार अपनी बेटी तो देते थे।

हमारे शास्त्रों में भी लिखा है कि पिता हो अपनी बेटी के शादी के समय अपने इच्छा अनुसार अपनी बेटी को जो देना चाहे वो दे सकता है। तब के समय कोई मांग नहीं होती थी। पिता सिर्फ अपनी इच्छा अनुसार ही देता था। और धीरे धीरे समय बदला और आज सभी लोग दहेज को अपना अधिकार मानाने लगे। और जैसे जैसे लालच बढ़ी तो रुपयों कि मांग गाड़ियों कि मांग और गहनों कि भी मांग करने लगे।

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दहेज एक बुराई का कारण

और इसी वजह से दहेज एक बुराई का कारण बन गया। और अब ये एक भयानक रूप लेलिया है। लोगो में होगया है। कि अगर हमारे लड़के को अच्छा दहेज नहीं मिला तो लोग यही सोचेंगे कि इनका बेटा उस लायक नहीं था। लोग पूछने आते है। जब किसी कि शादी हो जाती है तो कि आप के लड़के को कितना दहेज मिला या कितना मिल रहा है। दहेज के बढ़ती हुई बुराई को कारण हमारा समाज है।

और जैसे जैसे दहेज के कारण जुलम बढ़ने लगे उस तरह के कानून बनाने लगे। लेकिन बहुत सी महिलाये दहेज के कानून का गलत इस्तेमाल करती है। इस तरह कि महिलाये अपने पति पर झूठा केस कर देती है। और उनको परेशान करने लगती है। और उनके परिवार को भी। अगर लड़की के ससुराल वालो से किसी भी तरह कि लड़ाई होती है। तो लड़की सबसे पहले दहेज का झूठा आरोप लगाती है।

Kanoon Ke Anusar Dahej Kya Hai

दहेज कि सबसे पहले परिभाषा Dowry prohibition act 1961 में दी गई थी। जिसके अनुसार दहेज में ऐसी कोई भी सम्पति या कोई भी मूलयवान प्रतिभूत अभिप्रेत है। जो विवाह के समय, या उससे पहले या बाद में विवाह के एक पछकार द्वारा दूसरे पछकार को या किसी पछकार के माता पिता द्वारा विवाह के पछकार, या उसके माता पिता या अन्य व्यक्ति को दी गई है।

Dowry prohibition act 1961

या देने का करार किया गया है। लेकिन मुस्लिम में जो मेहर है। उसे दहेज नहीं माना गया है। क्युकी वो मुस्लिम महिलाओ का एक अधिकार होता है। दहेज कि जो परिभाषा Dowry prohibition act 1961 में दी गई है। इसका स्कोप काफी व्यापक रक्खा गया है। लेकिन अगर सर रूप में बात करे तो अगर शादी के पर्पस से लड़की के माता पिता अगर कोई गिफ्ट या कोई प्रॉपर्टी देते है। तो उसे दहेज माना जाता है।

अगर लड़के वालो के कहने पर अगर लड़की वाले लड़के वालो के किसी भी रिस्तेदार को कुछ गिफ्ट या प्रॉपर्टी देते है। तो उसे भी दहेज माना गया है। लेकिन ये जरुरी नहीं कि सिर्फ लड़के वालो को ही दहेज दिया जाता है। आप कई बार सुने होंगे कि लड़की वाले बोलते है लड़के वालो से कि आप हमारी लड़की के नाम प्रॉपर्टी कर दीजिये तो हम अपनी लड़की कि शादी कर देंगे आप के लड़के से। दहेज किसी भी परिस्थिति में लिया गया हो चाहे वो लड़की वाले लिए हो या लड़के वाले लिए हो दहेज हर स्थिति में अपराध माना गया है।

कई बार ऐसा होता है। कि हमको पढाई करनी है। या हमे कोई Business करना है और हमारे पास पैसे नहीं होते है तो हम अपने किसी रिस्तेदार का सहयोग लेते है। और कई लोग अपने ससुराल वालो से सहयोग मांगते है। तो यहाँ ये सवाल उठता है। कि सहयोग लेना भी दहेज होगा।

Appasaheb vs State of Maharashtra

इस मामले में Maharashtra High cort ने अपना मत दिया था। Appasaheb vs State of Maharashtra तो Maharashtra हाई कोर्ट का फैसला था कि इस परिस्थिति में इसे दहेज नहीं माना जायेगा। लेकिन लोग हाई कोर्ट के इस फैसले का भी गलत फायदा उठाने लगे और सहयोग के नाम पर दहेज लेने लगे तो इस तरह के कई केस लगातार आने लगे। तो फिर 2015 पंजाब हाई कोर्ट ने सहयोग को भी दहेज के रूप में होगा इसका फैसला लिया।

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