Hindi Kahani Moral Story

बकरी की चालाकी

बकरी की चालाकी

बकरी की चालाकी एक बार की बात है. एक किसान था. उसने ढेर सारी बकरियां पाल राखी थी. यही उसका व्यापार था. उसके घर के सामने दो कुआं था. एक कुएं में पानी था, जबकि एक कुआं सुख गया था. वे दोनों ही कुए थोड़ी ही दूर पर थे.  वह दिनभर बकरियों को चराता और फिर घर लौटने पर उसी कुएं से पानी निकाल कर बकरियों को पिलाता था. उनमें से एक बकरी बहुत ही नटखट थी. एक बार की  बात है सभी बकरियां चर कर आई और उसके बाद किसान से उन्हें पानी पिलाया, लेकिन उस नटखट बकरी ने पानी ना पीकर सूखे कुएं में ही छलांग लगा दी. अब कुएं में गिरते ही उसकी सिट्टी-पिट्टी गुम  हो गयी. वह जोर-जोर से चिल्लाने लगी. उसे लगा था कि वह आराम से इसमें से पानी पीयेगी.

 

बकरी की चालाकी

बकरी की चालाकी

अब किसान को कुछ समझ नहीं आ रहा था कि वह क्या करे. उसने अपनी तरफ से बहुत प्रयास किया, लेकिन वह सफल नहीं हो सका. तब उसने गांव के अन्य लोगों को बुलाया, सभी ने तमाम कोशिशें कीं, लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकला.

 

उधर बकरी गला फाड़-फाड़कर चिल्ला रही थी. उसकी इस हालत से किसान को बहुत दर्द हो रहा था. अंत में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि इस कुएं में मिटटी डालकर बकरी को दफना दिया जाए, जिससे उसे इस पीड़ा से मुक्ति मिले. अब वही किया जाने लगा.

 

अब जब बकरी ने देखा कि यई लोग उसे दफना रहे हैं तो उसके होश उड़ गए. उसने चिल्लाना बंद कर दिया और उसके ऊपर जीतनी बार मिटटी डाली जाती वह उसे झाड़कर उसके ऊपर खड़ी हो जाती. बकरी की चालाकी काम आने लगी. कुछ ही देर में वह काफी ऊपर आ गयी और फिर वह कूदकर कुएं से निकल गयी…इस तरह बकरी ने अपनी चालाकी से अपनी जान बचा ली.

 

नोट- जीवन में कितनी भी परेशानी आ जाए, कभी हार नहीं माननी चाहिए. अंतिम समय तक लड़ाई लड़नी चाहिए. तो मित्रों यह बकरी की चालाकी आपको कैसी लगी, कमेन्ट में अवश्य बताये और अन्य कहानियों के लिए ब्लॉग को अवश्य ही सबस्क्राइब कर लें. दूसरी कहानी पढ़ने के लिए इस लिंक Zindagi ka sabak hindi moral kahani पर क्लिक करें.

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