• January 2, 2022

Bahuvrihi Samas | बहुव्रीहि समास किसे कहते है

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Bahuvrihi Samas | बहुव्रीहि समास किसे कहते है | Bahuvrihi samas ke udaharan आज हम लोग बहुव्रीहि समास के बारे में पढ़ेंगे की बहुव्रीहि समास किसे कहते है और इसकी परिभाषा क्या है , और इसका अर्थ क्या है और बाकि के सब समास के कितना अलग है। इसके पदों में कौन विशेषता होती है। और सभी समास के पदों में नहीं होती है।

Bahuvrihi Samas
Bahuvrihi Samas

बहुव्रीहि समास किसे कहते है| Bahuvrihi samas kise kahate hain
बहुव्रीहि समास के पदों में जो दो पद मिले हुए है , तो इस दोनों पदों न ही पूर्व पद और न ही उत्तर पद प्रधान होता है , बल्कि Bahuvrihi Samas में दोनों पद यानि की पूर्व पद और उत्तर पद मिलकर किसी तीसरे पद को या तीसरे शब्द को इंगत करते यही या प्रधान बनाते है।

बहुव्रीहि समास की परिभाषा | Bahuvrihi samas ki paribhasha

जिस भी समास के सभी समस्तपदों में यानि की किसी भी दोनों पदों या शब्दो में चाहे वह पूर्व पद वह प्रधान न बल्कि दोनों पद या शब्द पूर्व पद और उत्तर पद दोनों मिलकर किसी तीसरे पद की और संकेत करते हो तो वहा बहुव्रीहि समास होता है।

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बहुव्रीहि समास के उदाहरण | Bahuvrihi samas ke udaharan

हम उदाहरण के माध्यम से पता लगाएंगे की वह की प्रकार से समस्त पदों में दोनों पद मिलकर किस तरह तीसरे पद की तरफ संकेत करते है।

समस्तपद – विग्रह
गजानन
– गजानन शब्द हर कोई सुना होगा और हर कोई देख भी होगा गजानन जब हम गजानन शब्द सुनते है तो हमारी दीमक में एक तस्वीर बन जाती है जी वह गणेश जी या फिर हाथी की , तो अब गजानन में न तो गज शब्द की प्रधानता है और न ही आनन की बल्कि ये दोनों पद पूर्व पद या शब्द और उत्तर पद या शब्द मिलकर एक किसी तीसरे पद या शब्द की तरफ इशारा कर रहे है या विशेष शब्द या पद की और संकेत कर रहे है। गजानन की विग्रह – गज से आनन वाला अतार्थ गणेश जी यही वह तीसरा शब्द है जिसके तरफ पूर्व पद इस शब्द और उत्तर पद या शब्द संकेत कर रहे है।

चतुर्भुज – चतुर्भुज शब्द हर कोई सुना होगा की चतुर्भुज क्या होता है आप सभी लोग जानते है , तो जैसे ही हमे सुनते है चतुर्भुज शब्द तो हमारे दीमक में एक तस्वीर बन जाता है की चार भुजा वाला एक चतुर्भुज या फिर चतुर्भुज शब्द को सुनते ही हम देवी देवताओ के याद करते है की किस देवी देवता के चार भुजा है तो हमारे दीमक में विष्णु जी या और कोई आता है। तो चतुर्भुज शब्द से या पद से हमे एक अलग पद या शब्द की अनुभूति होने लगती है , और वह पद है हमारे भगवन विष्णु तो इस चतुर्भुज में भी पूर्व पद और उत्तर पद मिलकर एक तीसरे पद की तरफ संकेत कर रहे है। और चतुर्भुज का विग्रह – चार है भुजाएँ जिसकी।

त्रिलोचन – उदाहरण

त्रिलोचन – त्रिलोच शब्द एक थोड़ा कठिन शब्द है ये शब्द शयद हर किसी को नहीं पता की इस शब्द का मतलब क्या है तो त्रिलोचन शब्द सुनते ही हमारे दीमक में तीन आँखों वाले भगवन की छवि आजाती हो और तीन आँखो वाले भगवन शिव है। तो त्रिलोचन के पूर्व पद या शब्द और उत्तर पद या शब्द मिलकर एक किसी तीसरे पद या शब्द की तरफ संकेत कर रहे है , वह त्रिलोचन है , यानि की शिव जी है। त्रिलोचन का विग्रह – तीन आँखों वाला।

दीर्घ-बाहु – जैसा की शब्द को देख कर ही पता चल रहा है की दीर्घ मतलब लम्बा और बाहु का मतलब भुजा या हाथ होता है , तो दीर्घ-बाहु शब्द सुनते ही हमारे दीमक में लम्बे हाथो वाला किसी के बारे सोचने लगते है तो लम्बे भुजाओ वाला भगवन होते है तो हमारे दीमक में विष्णु भगवान की तस्वीर छप जाती है , तो दीर्घ-बाहु पद या शब्द इसके पूर्व पद और उत्तर पद दोनों मिलकर एक तीसरे पद या शब्द की तरफ संकेत कर रहा है वह है विष्णु जी , दीर्घ-बाहु का विग्रह – लम्बी भुजाओं वाला ।

दशकंठ – उदाहरण

दशकंठ – इस शब्द को सुनते या देखते ही हमारे दीमक किसी एक तरह की छवि आने लगती है दशकंठ का अर्थ दस सिर वाला तो अब आप को पता ही होगा की दस सिर वाला कौन है दस सिर्फ वाला रावण है , तो यहाँ दशकंठ पद या शब्द इनके पूर्व पद या शब्द और उत्तर पद या शब्द मिलकर एक तीसरे शब्द या पद की तरफ संकेत कर रहे है वह शब्द रावण है। दशकंठ का विग्रह – देश कंठ है जिसके।

मुरलीधर – इस शब्द को सुनते ही हमारे दीमक में किसी मुरली बजाने वाले की छवि बन जारी है , मुरलीधर का अर्थ जो मुरली बजता हो और आप को पता होगा की श्री कृष्ण भगवन मुरली बजाते है तो मुरलीधर का पूर्व पद और उत्तर पद मिलकर एक तीसरे शब्द या पद की तरफ संकेत कर रहे है और वह शब्द कृष्ण है। मुरलीधर का विग्रह – मुरली धारण करने वाला।

निशाचर – निशाचर का विग्रह – निशा में विचरण करने वाला , और निशाचर शब्द का पहला पद यानि की पूर्व पद और उत्तर पद मिलकर एक तीसरे पद की तरफ संकेत कर रहे है , और वह पद या शब्द राछस। इन सभी समस्त पदों को देख कर के समझा की ये सभी पद एक किसी विशेष पद की ओर संकेत कर रहे है। Bahuvrihi Samas सबसे बड़ी विशेषता है की इस समास में कोई पद प्रधान नहीं होता है। बल्कि ये सभी पद मिलकर किसी तीसरे पद की तरफ संकेत कर रहे है.

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