Avyayibhav Samas

Avyayibhav Samas | अव्ययीभाव समास की परिभाषा , उदाहरण

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अव्ययीभाव का अर्थ क्या है – अव्ययीभाव का अर्थ जिसमे अव्यय का भाव हो या अव्यय का भाव छिपा हो

Avyayibhav Samas
Avyayibhav Samas

अव्यय किसे कहते हैं | avyav

लेकिन अब अव्यय क्या होता है इस अर्थ क्या होता है तो अव्यय का अर्थ – अव्यय वो शब्द है जिनके ऊपर लिंग , कारक , वचन और काल का प्रभाव नहीं पड़ता , मतलब उनके रूप में कोई बदलव नहीं होता है या परिवर्तन सील नहीं होते परिवर्तित नहीं होते है तो वो अव्यय होते है। अव्यय में से व्यय को अलग कर दीजिये तो व्यय शब्द आता है और व्यय का अर्थ खर्च या पररिवर्तित और अव्यय का मतलब न परिवर्तित होने वाला शब्द , ऐसा शब्द जो की अविकारी हो और जिसमे विकार उत्त्पन न हो और इसी अविकारी का भाव रखने वाले समास , अव्ययीभाव होते है या कहलाते है।

अव्ययीभाव की परिभाषा | avyayibhav samas ki paribhasha

अव्ययी भाव समास का क्या अर्थ है -वे समास जिसके पहले पद या शब्द अव्यय हो या अविकारी पद हो या शब्द हो और उनके संयोग से या उनके योग से पूरा पद या शब्द अव्यय बन जाए तो उसे हम अव्ययीभाव समास कहते है। या जिन शब्द या पद में अव्यय का भाव छिपा हो और योग से पूरा पद अव्यय बनता हो उसे हम अव्ययीभाव समास कहते है। या जिस सामासिक पद का पहला पद या पूर्व पद अगर प्रधान हो और उसके संयोग से समस्त पद या शब्द अव्यव बन जाए तो उसे हम अवयवी भाव कहते है।

अव्ययीभाव समास का उदाहरण | avyayibhav samas ke udaharan

उदाहरण में हम अव्ययीभाव के समस्त पद और विग्रह हो देखंगे
समास में एक पूर्व पद होता और उत्तर पद होता है

समस्त पद और विग्रह
आजन्म
– आजन्म का विग्रह आज से लेकर है। आज पूर्व पद है तो यह अव्यय है , जो की परिवर्तन शील नहीं है , और जन्म मूल शब्द है , आ और जन्म दोनों पदों के योग से जो समस्त पद बना वह आजन्म और ये जो आजन्म में पहला पूर्व पद है ,यही अव्यय है। और इसने संयोग से जो समस्त पद बना ये भी अव्यय बन गया। अव्ययीभाव की सबसे विशेष विशेषता होती है , इसके पूर्व पद अव्यय होने पर आजन्म का समस्त पद भी अपने आप अव्यय बन जाता है।

अनजाने – अनजाने का विग्रह बिन जाने है इसमें बिन पूर्व पद है तो यह अव्यय है , जो की परिवर्तन शील नहीं है , और बिन मूल शब्द है , अन और जाने दोनों पदों के योग से जो समस्त पद बना वह अनजाने और ये जो अनजाने में पहला पूर्व पद है ,यही अव्यय है। और इसने संयोग से जो समस्त पद बना ये भी अव्यय बन गया। अव्ययीभाव की सबसे विशेष विशेषता होती है , इसके पूर्व पद अव्यय होने पर आजन्म का समस्त पद भी अपने आप अव्यय बन जाता है।

घर-घर – ये जो घर- घर है और इनके बीच योचक चिन्ह प्रयोग कर देने से और जब हम इस तरह के एक ही शब्द को बार बार प्रयोग करते है , या दोहराते है तो वहा प्रत्येक का भाव छिपा होता है प्रत्येक घर प्रत्येक शब्द ही एक अव्यव है , या फिर अविकारी शब्द है।

उदाहरण – निस्संदेह

निस्संदेह – इस शब्द में जो नि लगा है वह अव्यय है निस्संदेह समस्त पर अव्यव बन गया और निस्संदेह का विग्रह सन्देश रहित हो गया।

प्रतिदिन – जैसे उदाहरण ४ में घर घर को आप ने समझा उसी तरह ये उदाहरण भी है , प्रतिदिन का विग्रह दिन-दिन होगा , इसमें प्रति जो की पहला पूर्व पद है, वह अव्यव है।

प्रत्यछ – इस शब्द में जो फल पूर्व पद प्रत्य है ये अव्यव है , इस शब्द प्रत्यछ का विग्रह आँखो के सामने है।

बेखटके – इस शब्द में जो बे है वह उपसर्ग है , और यह बे शब्द उपसर्ग होने साथ यह अव्यव भी है। बेखटके इस दोनों पदों के योग से जो समस्तपद बनाते है। वह खुद एक अव्यव बन गया। इस शब्द बेखटके का विग्रह बिना खटके होगा।

यथामति – यथामति का विग्रह मति के अनुसार होता है , यथा ये अव्यव या अविकारी शब्द है और जब यथा मूल शब्द मति के साथ लगा तो यह पूर्व पद अव्यव होने के कारण दूसरे या फिर समस्तपदो को अव्यव बना दिया, यथामति ये पूरा शब्द अव्यव बना दिया।

इस प्रकार हमने देखा की अव्ययीभाव समास के समस्त पद में जो पूर्व पद आए है , तो ये जो पूर्व पद है यह अव्यव है और इन्ही अव्यव के संयोग से समस्त पद बन जा रहा है।

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