Anupras Alankar

Anupras Alankar, अनुप्रास अलंकार की परिभाषा, उदाहरण, भेद

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शब्दालंकार की परिभाषा और भेद

Anupras Alankar
Anupras Alankar

शब्दालंकार दो शब्दो से मिलकर बना है शब्द + अलंकार जिस अलंकार में शब्दों के प्रयोग के कारण कोई चमत्कार उपस्थित हो जाता है , और उन शब्दो के स्थान पर समानार्थी दूसरे शब्दो के रख देने से वह चमत्कार समाप्त हो जाता है , वह शब्दालंकार माना जाता है। अथार्त जो अलंकार शब्दो के माध्यम से काव्यों को अलंकृत करते है , वे शब्दालंकार कहलाते है।

शब्दालंकार के 3 भेद होते है।
अनुप्रास अलंकार
यमक अलंकार
श्लेष अलंकार

अनुप्रास अलंकार की परिभाषा | Anupras Alankar ki Paribhasha

वर्णो की आवृति को अनुप्रास कहते है , आवृति का अर्थ है किसी वर्ण का एक से अधिक आना। मतलब कोई भी वर्ण अ – ज्ञ जो है एक से अधिक बार आये तो उसे आविर्ती कहते है।

अनुप्रास दो शब्दो से मिलकर बना है अनु + प्रासअनु‘ का अर्थ है बार बार तथा ‘प्रास‘ का अर्थ है वर्ण

जहा वर्ण की समानता के बिना भी वर्णो की बार बार आविर्ती होती है या जिस रचना में व्यंजन वर्णो की आवृति एक या दो से अधिक बार होती है , वह अनुप्रास अलंकार होता है।

अनुप्रास अलंकार के उदाहरण | Anupras Alankar Ke Udaharan

जैसे – मुदित महीपति अंदर आए।
सेवक सुमंत्र बुलाए।

यहाँ पहले पद में म वर्ण की और दूसरे पद में स वर्ण की आवृति हुई है , अतः यहाँ अनुप्रास अलंकार है।

तरनि तनूजा तात तमाल तरुवर बहु छाए।

जैसा की आप देख सकते है यहाँ उदाहरण में त वर्ण की आवृति हो रही है एवं हम जानते है की जब किसी वाक्य किसी वर्ण या व्यंजन की एक से अधिक बार आवृति होती है तब वह अनुप्रास अलंकार होता है। अतएव यह उदहारण अनुप्रास अलंकार के अंतर्गत आएगा।

अनुप्रास अलंकार के भेद उदाहरण सहित | Anupras Alankar ke bhed

अनुप्रास अलंकार कितने प्रकार के होते है
अनुप्रास अलंकार 3 प्रकार के होते है
१- छेकानुप्रास
२- वृत्यानुप्रास
३- लाटानुप्रास

छेकानुप्रास अलंकार | Cheka Anupras Alankar

काव्य में जहाँ कही भी एक से अधिक बार वर्णो की आवृति स्वरूप एवं क्रम से शब्द के आरम्भ में या अतः में सिर्फ एक बार हो अथार्त वह वर्ण दुहराया गया हो , वहाँ छेकानुप्रास अलंकार होता है।

छेकानुप्रास अलंकार के उदाहरण | cheka anupras alankar ke udaharan

उदाहरण
भारत भाग्य विधाता।
क्यों सही संसार का हाहाकार।
हस्ती हसकर चलती चलकर।
गिर गई मेरी छोटी कुटी।
जाग रही जाग में आभा।
कानन कठिन भयंकर भारी।
रीझि रीझि , रहसि रहसि हँसी हँसी उठे।

वृत्यानुप्रास अलंकार | Vritya Anupras Alankar

जहाँ एक या एक से अधिक वर्णों की आवृति तीन या तीन से अधिक बार होती है।

वृत्यानुप्रास अलंकार के उदाहरण | vritya anupras alankar ke udaharan

उदाहरण
प्रभु जब ज्ञात ज्ञान की ज्ञानी।
खड़क सी के खडंकने से खड़कती है खिड़किया।
विरति विवेक विमल विज्ञानं।
चारु चंद्र की चंचल किरणे खेल रही जल थल में।
चांदी के चम्मच से चटनी चटाई।

लाटानुप्रास अलंकार | latanupras alankar

जहाँ शब्द या वाक्य खंड की आवृति उसी अर्थ में हो और उसे मूल अर्थ में भेद आजाये लाटानुप्रास अलंकार कहलाता है।

लाटानुप्रास अलंकार के उदाहरण | latanupras alankar ke udaharan

उदाहरण
राम ह्रदय जाके नाही, विपत्ति सुमंगल ताहि।
राम ह्रदय जाके , नहि विपत्ति सुमंगल ताहि।।

पिय निकट जाके, नहि धाम चाँदनी ताहि।
पिय निकट जाके नहीँ , धाम चाँदनी ताहि।।

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