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जानिये सर्पों के केचुली उतारने का रहस्य

जानिये सर्पों के केचुली उतारने का रहस्य

जानिये सर्पों के केचुली उतारने का रहस्य हिंन्दु धर्म में सर्प का बहुत महत्व है. हिन्दू धर्म में नाग की पूजा की जाती है और इन्हें नाग देवता कहा जाता है. हर साल नागपंचमी के दिन नागों की विशेष पूजा की जाती है. भगवान विष्णु शेषनाग पर सोये रहते हैं तो भगवान शंकर के गले में विषधर विराजमान रहते हैं.

 

जानिये सर्पों के केचुली उतारने का रहस्य

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जानिये सर्पों के केचुली उतारने का रहस्य 

हर रीढधारी प्राणियों की त्वचा की उपरी परत समय – समय पर मृत हो जाती है और इसी कारण एक निश्चित समय पर सांप भी अपनी मृत त्वचा अर्थात केचुली को निकाल देता है. यह प्रक्रिया काफी जटिल होती है. केचुली उतारने के करीब एक सप्ताह पहले से सांप सुस्त हो जाता है. इस समय लिम्फेटिक नामक द्रव्य के कारण सांपो की आँखे सफेद होकर अपारदर्शक हो जाती हैं. इसीलिए केचुली निकालने से पहले सांप किसी ऐसे स्थान पर चला जाता है, जहां उसे कोई देख ना सके. इस दौरान वह भोजन भी करते और इस कारण वे काफी कमजोर और असक्त हो जाते हैं.

 

सांपो के केचुली निकालने का तरिका बहुत ही कष्टदायी होता है. सर्वप्रथम सांप अपने जबड़े से केचुली को निकालते हैं क्योकि यह सबसे अधिक ढीली रहती है और इसे निकालने के लिए सार्प काटों और पत्थरों की सहायता लेते हैं. सर्वप्रथम सांप अपने जबड़ों को किसी खुरदरी जगह पर रगदते हैं जिससे यह भाग कट कर अलग हो जाए और उसके बाद इस भाग को काटों या पत्थरो में फंसाता है और अपने बदन को सिकोड़कर धीरे धीरे खिसकता है. इस क्रिया में वह बहुत हि बेचैनी महसूस करता है. इस केचुली से यह पता किया जा सकता है कि कितना बड़ा है. सांप लगभग साल में ३ से ४ बार और अजगर साल में एक बार केचुली निकालता है. सांप अपने जीवनकाल में कितनी बार केचुली निकालेगा वह उसके उम्र, सेहत, उसके प्राकृतिक आवास, तापमान और आद्रता पर निर्भर करता है. मित्रों यह पोस्ट जानिये सर्पों के केचुली उतारने का रहस्य आपको कैसी लगी कमेन्ट में बताएं और अन्य कहानी के लिए इस लिंक Sapon ki Jeebh Kyon Kati Hoti Hai Interesting Facts पर क्लिक करें.

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