Moral Story

रैकेट hindi Moral Story

रैकेट hindi Moral Story धर्मा, पिंटू और उसकी छोटी बहन दोनों  रैकेट  से खेल रहे थे. इसके पहले कि धर्मा कुछ जवाब देता, पिंटू ने अपनी छोटी बहन को रैकेट से एक रैकेट मार दिया और वह भागने की तैयारी में ही था कि धर्मा और रानी ने मिलकर उसे पकड़ लिया और रैकेट छीनने की कोशिश करने लगे, रानी गुस्से में चिल्ला भी रही रही थी कि मैं आज इस रैकेट को ही तोड़ दूँगी…जब देखो सबको रैकेट से मारता रहता है. आखिर में धर्मा के सहयोग से रानी पिंटू से रैकेट छीनने में सफल रही और वो रैकेट को तोड़ने लगी. उसने पूरी कोशिश की लेकिन असली बात यह है कि अगर हमें विश्वास है तो सफलता अवश्य मिलाती है और यही इस रैकेट hindi Moral Story नहीं टूट रहा था, रैकेट को तोड़ने की कोशिश में रानी के हाथों में घाव जरूर हो गया था. 

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रैकेट

इस कोशिश रैकेट काफी टेढ़ा हो गया ….इस पर रानी गुस्से और चिड़चिनेपन के मिश्रित भाव से धर्मा से बोली…अरे यह रैकेट तो टूट ही नहीं रहा है.
इस पर पिंटू जोर-जोर से हंसने लगा और हंसते हुए बोला…यह रैकेट नहीं टूट सकता…यह मेरा दोस्त है. इस पर रानी ने चिढ़ कर उस रैकेट को वही ज़ोर से फेक दिया.
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भाग-२
जूनियर हाईस्कूल, पिथौरागढ़, उत्तराखंड
पिंटू पढ़ाई में तो एकदम जीरो था लेकिन जब बात खेल की आती थी तो उसका कोई सानी नहीं था. स्कूल में कबड्डी के खिलाड़ियों का चयन किया जा रहा था. चयनकर्ता जितेंद्र उर्फ जीतू सर खिलाड़ियों का चयन कर रहे थे. सभी खिलाड़ियों का चयन करने के बाद जितेंद्र सर ने खिलाड़ियों को संबोधित करते हुए कहा कि हमारी टीम हमारी टीम परसों उधमपुर में मैच खेलने जाएगी और बच्चों हमें जीत कर ही आना है. वहाँ और भी टीमें रहेंगी लेकिन हमारी टीम बेस्ट है. इस तरह उन्होने सभी को प्रोत्साहित किया.
मैच की ठीक एक दिन पहले अर्थात अगले दिन टीम के सबसे अच्छे खिलाड़ियों में शुमार पदम ठाकुर की तबीयत अचानक सी खराब हो गयी. उसने फोन करके जितेंद्र सर से कहा कि वह मैच खेल पाने असमर्थ है. उसकी तबीयत बहुत ही ज़्यादा खराब है. अब जितेंद्र सर बहुत ही असमंजस में पड़ गये. अब वे प्रतियोगिता से नाम नहीं वापस ले सकते थे ऐसे में स्कूल की बदनामी होने का डर था. उसी स्कूल में धर्मा भी पढ़ता था जिसे जितेंद्र सर बहुत मानते थे. जितेंद्र सर बहुत ही चिंतित थे और स्कूल की छुट्टी हो जाने के बाद भी अपने आफिस में बैठे थे. इतनी में धर्मा उनके आफिस के सामने सी गुज़रा यह उसका रोज का काम था क्योंकि उसका क्लास जितेंद्र सर के आफिस के पीछे था. उसने देख कि सर बहुत ही चिंतित हैं तो वह उनके आफिस के दरवाजे के पास आकर खड़ा हो गया लेकिन जितेंद्र सर को इसका तनिक भी आभास नहीं हुआ.
धर्मा ने हल्के से दरवाजे को खटखटाया, तब जीतू सर कि तंद्रा भंग हुई. उसने जीतू सर से इस से इस चिंता का कारण पूछा तो जीतू सर बड़े ही धीमे स्वर में सारी बाते बता दी. इस पर धर्मा ने चहक कर कहा सर समझो कि आपका काम हो गया. सर मेरा भाई पिंटू जो कि खेलने में बहुत ही उस्ताद है…आप कहें तो मै उससे बात करू…आप निराश नहीं होंगे.
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चिंता

लेकिन..जितेंद्र सर इसके आगे कुछ कहते कि धर्मा उनकी बात को समझ गया और उन्हें बीच में ही टोकते हुये कहा कि सर शायद आप भूल रहे हैं कि पिंटू ने इसके पहले पंचायत स्तर के कबड्डी के खेल में अपनी प्रतिभा का परिचय दिया था और उस मेडल भी मिला था.
 हां….हां याद आया…ठीक है तुम बात करो और अगर वह तैयार होता है तो तुरंत मुझे बताओ….जितेंद्र सर ने थोड़ा मुस्कराते हुए बोला…अब वे थोड़ा बढ़िया फील कर रहे थे.

 

उधमपुर जिले में ही पिंटू का ननिहाल है और किस्मत का खेल देखिए किं उधमपुर जिले की टीम का भी एक खिलाड़ी किसी कारण कम हो गया था. पिंटू का दोस्त रमेश जो कि पढ़ने में बहुत ही बढ़िया था और उसका घर पिंटू के नाना के घर के ठीक बगल में था, जिसके कारण वे दोनों अच्छे दोस्त बन गये थे और उनमे बहुत अच्छी दोस्ती थी. उसने भी अपने सर को पिंटू का नाम सूझा दिया था. लेकिन पिंटू अब वापस कबड्डी का खेल नहीं खेलना चाहता था, उसने बैटमींटन को चुन लिया था और उसी में ही अपना कैरियर बनाना चाहता था.
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ड्राइंग

 अनहि आप पढ़ रहे हैं  रैकेट hindi Moral Story 
धर्मा पिंटू से मिलने उसके नाना के घर आया, उस समय पिंटू प्रेक्टिस कर के वापस लौटा था, इतने में रमेश भी आ गया. पिंटू ने दोनो की बातों को ध्यान से सुना, अब वह बुरी तरह असमंजस में पद गया था. अब वह किसकी बात माने और वह भी तब जब वह खुद इस खेल को नहीं खेलना चाहता था. अगर वह भाई का साथ देता तो दोस्त बुरा मान जाता और अगर दोस्त की बात मानता तो भाई……वह गहरे सोच में डूब गया. काफी सोचने के बाद वह स्कूल की तरफ से खेलने को राज़ी हो गया. उसने रमेश को समझते हुए कहा कि अगर मैं स्कूल के खिलाफ खेलता हूँ तो भाई की बदनामी होगी और अगर मैं उधमपुर की तरफ से खेलता हूँ और किसी कारणों से उधमपुर टीम हार जाती है तो लोग मेरे उपर आरोप लगा देंगे कि भाई की टीम को जीताने के लिए इसनी बढियाँ नहीं खेला. लेकिन फिर भी मैं दोनों लोगों को एक मौका दे रहा हूँ….मेरी एक शर्त है मेरा रैकेट मेरे साथ ही रहेगा….अब यह जिसको मंजूर हो मई उसकी टीम में जाने को तैयार हूँ.
अभी रमेश सोच ही रहा था कि धर्मा ने हां कह दी. उसासने सारी बातें जीतू सर को बताई…इस पर उन्होने कहा कि यह कबड्डी का खेल है हम रैकेट की कैसे इजाज़त दे सकते हैं.
सर इसका भी मेरे पास एक उपाय है. रैकेट को हम मैच रेफ़री के पास रख देंगे…….धर्मा ने खुश होते हुए कहा..
गुड, वेरी गुड….थैंक यू….अब मेरी चिंता ख़त्म हो गयी.
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लाइब्रेरी

दोनो ही टीमें मैदान में पहुच गयी. उधमपुर की तरफ से भी दूसरे खिलाड़ी को ले लिया गया था. पूरा मैदान दर्शकों से पट गया था. दर्शकों में गजब का उत्साह था, सभी टीमें जब मैदान में प्रवेश कर रही थी तो सबकी नज़रें पिंटू पर ही थी, लोग यह सोच रहे थे कि कबड्डी के मैदान में यह रैकेट लेकर क्यों आ गया…आख़िर माजरा क्या है. मैच शुरू होने के पहले खिलाड़ी एक दूसरे पर छींटाकसी करने लगे, विपक्षी टीम के खिलाड़ी पिंटू का मज़ाक उड़ाने लगे, लेकिन पिंटू कुछ नहीं बोला . उसने रैकेट रेफ़री को दे दिया. मैच आरंभ हो गया….पहले ही चक्कर में पिथौरागढ़ की टीम उधमपुर पर भारी पड़ने लगी और यह सिलसिला अंत तक रुका नहीं, अंत में पिथौरागढ़ उधमपुर को भारी अंतर से हरा दिया.
पिंटू को सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी चुना गया. उसको इनाम लेने के लिए मंच पर बुलाया गया. तालियों की गड़गड़ाहट के बीच वह मंच पर पहुंचा. उस इलाक़ेकेविधायक हाथों उसे सम्मानित किया गया. विधायक जी ने कहा कि आज तुमने बहुत ही अच्छा प्रदर्शन किया…. तुम्हारे इतना बढ़ियाँ प्रदर्शन करने का कारण क्या है और यह रैकेट का क्या राज है, जिसे लेकर तुम मैदान में गये थे.
विश्‍वास …… हां सही सुना आप सभी लोगों ने…कहा जाता है कि भगवान कण-कण में रहते हैं…तो मेरा भगवान इसमें रहता है.  यही इस कहानी hindi Moral Story का सच है. असली बात यह है कि अगर हमें विश्वास है तो सफलता अवश्य मिलाती है और यही इस रैकेट hindi Moral Story में बताया गया है.

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