धमनी और शिरा में अंतर

धमनी और शिरा में अंतर | Difference Between Arteries and Veins in Hindi

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धमनी और शिरा
धमनी और शिरा में अंतर हमारे शरीर में रक्त रुधिर वाहिनियों में रहता है , अथार्थ हृदय से होता हुआ रक्त पुरे शरीर में विस्तृत रूप से फैली मोटी – पतली रुधिर वाहिनियों में निरंतर बहता रहता है। हम सब के शरीर रुधिर वाहिनियों के दो तंत्र होते है।
1- धमनी तंत्र
2- शिरा तंत्र

धमनी और शिरा में अंतर
धमनी और शिरा में अंतर

ह्रदय नियमित रूप से शिराओं में रक्त को शरीर के विभिन्न भागो से एकत्रित करके धमिनयों में पम्प करता है। सम्पूर्ण शरीर में धमनियों तथा शिराओं जाल फैला होता है।


धमनियां विभाजित होकर धमनिकाये बनती है फिर धमनिकाये पुनः पतली नलिकाओं में विभाजित हो जाती है। जिन्हे धमनी कोशिकाएं कहते है। इस प्रकार सभी मिल कर मिलकर धमनी तंत्र का निर्माण करती है। इसी तरह शिराएं भी विभाजित होकर शिरा तंत्र का निर्माण करती है।

धमनी और शिरा में अंतर | Differences between Arteries and Veins

धमनी |Arteries
धमनी के भित्ति लचीली और मोटी होती है।
धमनी रक्त को ह्रदय से आगे तक ले जाती है।
इनमे शुद्ध रक्त बहती है o2 युक्त होता है।
धमनी में रक्त रुक रुक कर बहती है, और रक्त अधिक दबाव के साथ बहता है।
धमनी की दीवारे मोटी होने के कारण से धमनियाँ खली होने पर पिचकती हीं है।
धमनी का राग गुलाबी या गढ़ा लाल होता है।
इनमे कपाट नहीं होते है।
केवल पल्मोनरी धमनी इसका अपवाद है।

शिराये |Veins
शिराये ये रक्त को सभी अंगो से हृदय तक ले जाती है।
इनमे अशुद्ध रक्त बहता है, CO2 युक्त
इनमे रक्त धीमी गति से निरंतर बहुत काम दबाव के साथ बहती है।
शिराये की दीवारे पतली होती है।
शिराये खली होने पर पिचक जाती है।
शिराये का राग नीला होता है।
शिराये में कपाट होते है।
केवल पल्मोनरी शिरा इसका अपवाद है।

नोट – केवल पल्मोनरी धमनी हृदय से अशुद्ध रक्त को शुद्धिकरण के लिए फेफड़ो तक ले जाती है।

दोहरा रुधिर परिसंचरण तंत्र – double blood circulation system

हमारे शरीर में शुद्ध और अशुद्ध दोनों तरह की रुधिर बहता है। फेफड़ो से पल्मोनरी द्वारा शुद्ध रुधिर हृदय के बाएं अलिंद में तथा समस्त शरीर का अशुद्ध रुधिर दाएं अलिंद में पहुँचता है। शुद्ध बाएं अलिंद से बाएं निलय में और बाएं निलय से सारे शरीर में प्रवाहित होता है। अशुद्ध रुधिर दाएं अलिंद से दाएं निलय में पहुँचता है। और वहा से फेफड़ो में पम्प कर दिया जाता है। इस प्रकार शरीर में शुद्ध व अशुद्ध रुधिर अलग – अलग परिसंचरण करता है। ऐसे परिसंचरण को दोहरा परिसंचरण कहते है।

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